Saturday, 16 January 2016

सुप्रीम कोर्ट ने वेज रिवीजन रुकवाने संबंधी पेटिशन सिरे से ख़ारिज की;याचिकाकर्ता को फटकार

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सुप्रीम कोर्ट ने वेज रिवीजन रुकवाने संबंधी पेटिशन सिरे से ख़ारिज की;याचिकाकर्ता को फटकार ;जज की आँखों में सैलरी देख कर आंसू आये।

संवाददाता : आज 16 जनवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कटियार की कोर्ट में बे माँ  कर्मचारियों के वेज रिवीजन रुकवाने संबंधी याचिका लगाई गई थी। आवेदन के साथ बेमाँ कर्मचारियों का नवीनतम वेतन सूची लगी थी जिसे देख कर जस्टिस के आँखों के आंसू रोके नहीं रुके। कोर्ट का माहौल एकदम से शांत हो गया ,सुई गिरने की आवाज़ भी सुनी जा सकती थी। कुछ देर तक ऐसा ही माहौल था। माननीय जस्टिस ने अपने आप को मुश्किल से सम्भालते हुए आंसू रोके, याचिका वहीँ फाड़ दी और पेटिशनर को बुला कर खरी खरी सुनाई और फटकार लगाते हुए याचिका सिरे से ख़ारिज कर दी।
"आज के ज़माने में इत्ते पैसे में क्या होता है।" कहते हुए जस्टिस ने बे माँ कर्मचारियों के साथ अपनी संवेदना दर्शायी। पेटिशन को पब्लिसिटी स्टंट और कमजोर बे माँ कर्मचारियों को डराने के लिए लगाया जाना बताया। कोर्ट  ने हिदायत दी की भविष्य में इन भोले भाले लोगों के खिलाफ यदि फालतू की याचिका लगा कर कोर्ट का समय बर्बाद किया तो कड़ी कार्यवाही की जाएगी। अंत में जस्टिस कटियार ने पूरे बे माँ परिवार को रात भर  एरियर कैलकुलेशन और शनिवार को ही पेमेंट कर देने पर बधाई दी।

Sunday, 10 January 2016

चौरसिया समाज का सामाजिक मिलन कार्यक्रम


आज दिनांक 10 जनवरी को चौरसिया समाज का सामाजिक मिलन कार्यक्रम का आयोजन किआ गया। कार्यक्रम में रायपुर, धमतरी ,महासमुंद के अलावा अन्य शहरों के बंधुओ ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंदिर में यज्ञ से हुई ।जिसमे सभी ने आहुतियां डाली और माता गायत्री की पूजा अर्चना की। भोजन के पश्चात् गायत्री परिवार अभनपुर के प्रमुख श्री आर एस चौरसिया जी की अध्यक्षता में समाजिक समस्याओ पर  विचार गोष्टी हुई । बधुओं ने राजिम और चंपारण के मंदिर का भी दर्शनलाभ लिया।  अंत में धन्यवाद ज्ञापन में श्री चौरसिया जी ने समय समय पर ऎसे सामाजिक आयोजन होते रहने की आवश्यक्ता पर प्रकाश डाला।

Wednesday, 6 January 2016

घर का चूल्हा

"दो स्पेशल चाय इलायची वाली " विकास ने होटल वाले लड़के को कहा। हमेशा की तरह विकास चौक के चौरसिया होटल में चाय पीने पहुंचा था | चाय पीते हुए विकास अपने मित्र के साथ यहाँ वहाँ की बाते कर रहा था  अचानक उसकी नजर कोने में अकेले बैठे नवयुवक पर पड़ी । पतला दुबला ,बिखरे बाल, पैरों में चप्पल पहना युवक थोड़ा परेशान लग रहा था।

"अरे वही लड़का और फिर से ये अखबार में पता नहीं क्या ढूंढ रहा है " विकास ने मन में सोचा
विकास पिछले कई दिनों से इस लड़के को रोज़ाना इसी वक़्त होटल में पाता।

उस दिन विकास अकेले होटल में पहुंचा अपनी टेबल में बैठने से पहले ही उसने फिर उसी लड़के को देखा विकास एक पल के लिए रुका और कुछ निश्चय करके उस लड़के की टेबल की ओर बढ़ा और टेबल में सामने की ओर बैठ गया । लड़का अनजान आदमी को अपने सामने पा कर थोडा घबरा गया। विकास ने मुस्कुराते हुए अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया और अपना परिचय दिया। उस लड़के ने भी धीरे से हाथ मिलाया।

"छोटू दो स्पेशल चाय और दो प्लेट समोसे ले आ" विकास ने आर्डर दिया। इस तरह दोनों के बीच बातचीत होने लगी उस लड़के का नाम अजंता था। अजंता एक पढ़ा लिखा युवक था परंतु आर्थिक तंगी की वजह से कॉलेज पूरा नहीं कर पाया वह नौकरी के लिए भटक रहा था। उसने विकास को बताया की रोज़ अख़बार में नौकरी के विज्ञापन देखता है परंतु कहीं सफलता नहीं मिलती।

"घर में माँ पिता के साथ दो छोटी बहनें हैं पिता की कमाई से जैसे तैसे घर चलता है। बहनो की शादी के लिए मुझे काम करना जरूरी है। "यह कहते हुए उसकी आँखे नम हो गई  । विकास ने उसे धीरज बंधाया।

"मैं तुम्हारी मदद कर सकता हूँ अगर तुम चाहो तो" विकास ने अपनी चाय ख़त्म करते हुए कहा।

"वो कैसे ?क्या आप मुझे नौकरी दिला सकते हो?" अजंता ने उम्मीद और आश्चर्य से पूछा।

विकास मुस्कुराया और हँसते हुए अपना कार्ड उस युवक को दिया और कल 11 बजे ऑफिस में मिलने को कहा ।

अगले दिन विकास ने उस युवक की मुलाक़ात ऑफिस में सभी से करवाई । विकास को काम समझाया ऑफिस की औपचारिकता भी विकास ने स्वयं की और अजंता को ईमानदारी लगन और नम्रता से काम करने को कहा।
अजंता को अपने काम में बहुत सफलता मिली कुछ ही साल में उसने अपनी बहनों की शादी धूम धाम से की । स्वयं का घर बनाया जिसमे वह अपने माता पिता बीवी और दो बच्चों के साथ रहता है। समाज में अजंता की पूछ परख बढ़ गई और उसे सम्मान मिला।

कुछ साल बाद

"मैडम ये काम तुरंत कर दो " कुछ पेपर्स टेबल में पटकते हुए अजंता ने रौब से कहा।

चूँकि मैडम नई थी इसलिए उन्होंने विरोध किआ और कहा पहले जिन्होंने पेपर्स दिए हैं उनका काम होगा।

अजंता भड़क गया । मैडम आप हमें नहीं जानती

"हम कमा के लातें हैं तो आपके घर में चूल्हा जलता है,अभी देखना आप कैसे करती हो मेरा काम" यह कहते हुए उसने अपने पेपर वापस लिए और शाखा प्रबंधक के कक्ष में जाके मैडम की शिकायत कर दी।

शाखा प्रबंधक तुरंत मैडम के पास पहुँचे और फटकार लगाते हुए अजंता का काम सबसे पहले करने के निर्देश दिए।

मैडम कुछ नहीं समझ पायी बस आज्ञा का पालन किआ पर पत्र टाइप करते हुए उनके कानों में गूंज रहा था "हम कमा कर लातें हैं तो आपके घर चूल्हा जलता है"

नोट: इस काल्पनिक कहानी का बीमा उद्योग से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है

पंकज सिंह

Thursday, 31 December 2015

2016 तुम आ तो गए हो

2016 तुम आ तो गए हो अपने बड़े भाई 2015 को पीछे छोड़ । इस दुनिया में आने से पहले तुम्हारे बड़े भैया ने तुम्हे कुछ टिप्स तो जरूर दी होंगी । शायद ये भी स्पष्ट कर दिया होगा की तुम्हारे पास केवल 366 दिन का समय है और चुनौतियां कई सारी । उसने तुम्हे इतिहास में अपनी छाप छोड़ने के लिए प्रोत्साहित तो किया ही होगा। उसने ये भी बताया होगा की तुम्हारे आगमन में लोगों ने जैसा उत्साह दिखाया वो वक्त के साथ साथ मंद होता जाएगा । तुम्हारे आगमन पर खूब पार्टियां मनी लोगो में गज़ब का उत्साह था जैसे की वो वर्षों से तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे हों पर तुम किसी मुगालते में मत रहना ये लोग तुम्हारे बड़े भाई 2015 और उसके बड़े भाई 2014 के साथ भी ऐसा ही किए थे । इस लिए तुम सेलिब्रेशन को "business as usual " लेना और अपने काम में पहले दिन से लग जाना। एक दिन एक्स्ट्रा पा कर तुम पहले ही स्पेशल हो गए हो ,हालाँकि तुम्हारे चाहने वाले तो पूरी दुनिया में है पर तुम भारत पर ही फोकस करना क्योंकि चीन ने तो तुम्हे बन्दर बना रखा है । भारत 2015 में रेसिंग ट्रैक में अपनी पोजीशन ही लेता रहा ये सोच के की नए साल में ही रेस स्टार्ट करेगा। तुम मेक इन इंडिया में योगदान देते हुए प्रोडक्शन बढ़ाओगे ऐसा लोगों को लग रहा है। आरबीआई अपना फोरेक्स रिज़र्व 750 बिलियन डॉलर  करने का सपना सच होते तुम्हारे राज़ में ही देख रहा है। इज़ ऑफ डूइंग बिज़नस में भारत पहले 100 में और HDI में श्री लंका से आगे लाने की अपेक्षा यदि तुमसे रखता है तो इसमें क्या गलत है। आखिर तुम्हारे पिता ने भी तो समझाया होगा की बेटा यदि भारत में हिन्दू मुस्लिम दंगे ,ISIS हमले या फिर प्राकृतिक आपदा भी आएगी तो राजनेता और जनता ठीकरा तुम्हारे ऊपर ही फोड़ेंगे। पक्ष को मजबूत करने के लिए दो चार स्वयंभू ज्योतिष सामने आ जाएंगे और राहु केतु के जाल में फंसा कर अपनी थ्योरी को प्रूफ भी कर देंगे। इसलिए तुम मानसून प्लानिंग पहले से कर लो जिससे तय समय पर वह केरल तट पर आ जाए। हालांकि तुम्हारे मन भी अपने भैया की तरह डेल्ही और बिहार ब्लास्ट करने की तमन्ना होगी लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा कोई धमाका करने से पहले दादरी और बीफ एपिसोड को ध्यान में ले आना।  मशहूर होने के लिए चेन्नई वर्षा जैसा कारनामा करना तुम्हारे मन में तो नहीं है न? हवाई यात्रा में इस साल ज्यादा समय मत देना अरे भाई भारत में ही तुम्हे सबसे ज्यादा चाहने वाले हैं तो और कहीं क्यों जाना।

-शुभकामनाओं सहित

Wednesday, 8 July 2015

छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटक स्थल -भाग 1



राजिम-  छत्तीसगढ़ के प्रयाग के नाम से मशहूर राजिम रायपुर शहर से 48 किमी दूर तीन नदियों महानदी, पैरी और सोंढूर के संगम पर स्थित है | यहाँ पर प्रसिद्ध राजीवलोचन मंदिर स्थित है जिसका निर्माण नलवंशी विष्णु उपासक शासक विलासतुंग ने 7 वीं शताब्दी में करवाया था | प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा यहाँ राजिम कुम्भ का आयोजन किया जाता है जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार पुरी के भगवान जगन्नाथ यहां स्वयं भगवान विष्णु की पूजा के लिए आते है अतः पुरी की यात्रा के बाद यहाँ की भी यात्रा अनिवार्य मानी गई है |
राजीव लोचन मंदिर के अलावा यहाँ कुलेश्वर महादेव , राजेश्वर मंदिर, दानेश्वर मंदिर , रामचंद्र मंदिर , पंचेश्वर महादेव मंदिर , राजिम तेलिन मंदिर , भूतेश्वर महादेव मंदिर , जगन्नाथ मंदिर और सोमेश्वर महादेव मंदिर दर्शनीय है |

राजिम :राजीव लोचन मंदिर 

राजिम :कुलेश्वर महादेव मंदिर 
सिरपुर- महासमुंद जिले में महानदी के पूर्व पर छत्तीसगढ़ का प्राचीन नगर सिरपुर बसा हुआ है इसका प्राचीन नाम श्रीपुर अर्थात समृद्दी की नगरी था | सिरपुर शरभपुरी पांडुवंशियों तथा सोमवंशी राजाओ की प्राचीन राजधानी होने के साथ साथ बौद्ध आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र थी | सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर लाल ईटों से निर्मित भारत के सर्वोत्तम मंदिरों में से एक है इसका निर्माण महारानी वसाटा देवी ने अपने पति हर्षगुप्त  की याद में 650 ई. में कराया था | यह मूलतः विष्णु मंदिर है और इसके गर्भगृह में शेष नाग ,लक्ष्मण की प्रतिमा है इसी से इसका नाम लक्ष्मण मंदिर पड़ा |  सिरपुर 6 वी से 10 वी शताब्दी तक बौद्ध आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र था यहाँ महात्मा बुद्ध का आगमन भी हुआ था चीनी यात्री व्हेनसांग ने यहाँ की यात्रा की थी | सिरपुर में अब तक 12 बुद्ध विहार, 1 जैन विहार , 22 शिव मंदिर और 5 विष्णु मंदिर प्राप्त हो चुके है इसके अलावा यहाँ 6 वीं सदी के आयुर्वेदिक स्नान कुंड की भी खोज की गई है | यहाँ के चंदा दाई गुफाओं में नागार्जुन जिन्हें गौतम बुद्ध के बाद सबसे प्रमुख बौद्ध दार्शनिक माना जाता है ने पहली और दूसरी शताब्दी के मध्य ध्यान किया था | वर्ष 2014 में अध्यात्मिक गुरु दलाई लामा जी ने इसी स्थान पर ध्यान किया और परम शांति का अनुभव किया |
छत्तीसगढ़ सरकार सिरपुर में हर वर्ष राष्ट्रीय नृत्य और संगीत महोत्सव का आयोजन करती है जिसमे देश विदेश की जानी मानी हस्तियाँ कार्यक्रम प्रस्तुत करती है | इस वर्ष पद्म विभूषण पंडित बिरजू महाराज का कत्थक विशेष आकर्षण था |




भोरमदेव – भोरमदेव कवर्धा से 18 किमी दुरी पर स्थित है | यह मंदिर गोंड़ जनजाति के देवता भोरमदेव के नाम से बनाया गया था | नागर शैली में निर्मित यह मंदिर छत्तीसगढ़ में स्थापत्य व मूर्तिकला में अपना विशेष स्थान रखता है |इसका निर्माण 1089 में फणीनागवंशी राजा गोपालदेव ने कराया था |  इसके मुख्य मंदिर में शिवलिंग स्थापित है तथा दीवारों पर हाथी , घोड़े  नटराज, गणेश , मिथुन की मुर्तिया बनी हुई है, इनकी साम्यता कोणार्क के सूर्य मंदिर व खजुराहो की मुर्तियों से है , भोरमदेव को  छत्तीसगढ़ का खजुराहो भी कहते है | यहाँ अन्य प्रमुख मंदिर मडवा महल जिसे दुल्हादेव भी कहते है स्थित है इसका आकार विवाह मंडप की तरह है  जिसका निर्माण संभवतः विवाह संपन्न कराने के लिए कराया गया था | एक अन्य शिव मंदिर छेरका महल भी देखा जा सकता है


भोरमदेव मंदिर 


भोरमदेव : मंडवा महल 
शिवरीनारायण –  जांजगीर जिले में स्थित शिवरीनारायण राज्य के धार्मिक और पौराणिक महत्व का स्थान है | यहाँ तीन नदियों महानदी, शिवनाथ व् जोंक नदी का त्रिवेणी संगम है | मान्यता के अनुसार श्री राम ने अपने 14 वर्षीय वनवास काल में शिवरीनारायण की यात्रा की थी और यहाँ शबरी के झूठे बेर खाए थे | शबरी के नाम पर इस स्थान का नाम शिवरीनारायण पड़ा | यहाँ स्थित नर-नारायण मंदिर लगभग 12 वीं शताब्दी का है जिसका निर्माण रजा सबर ने करवाया था | इसके ठीक सामने 9 वीं शताब्दी में बना केशव नारायण मंदिर में भगवान विष्णु की अत्यंत प्राचीन प्रतिमा है | जिसके मुख्य द्वार पर भगवान् विष्णु के विभिन्न अवतारों के विवरण उल्लेखित है |
यहाँ 7 वी शताब्दी में बना लक्ष्मेश्वर शिव मंदिर अत्यंत विलक्षण है इसके गर्भ गृह में स्थित शिव लिंग में 1.25 लाख छोटे-छोटे शिव लिंग है | ऐसी मान्यता है की यदि यहाँ भगवान  को 1.25 लाख चावल के दाने भोग लगाने से भक्तो की सभी मनोकामना पूर्ण होती है !



शिवरीनारायण: नर नारायण  मंदिर 


शिवरीनारायण : केशव नारायण मंदिर 

तालागांव – यह बिलासपुर से लगभग 27 किमी दूर मनियारी नदी के तट पर स्थित है | तालागांव में देवरानी –जेठानी मंदिर के नाम से विख्यात शिव मंदिर है जिसका निर्माण शरभपुरी शासन की दो रानियो ने करवाया था | लाल बलुए पत्थरो से बना देवरानी मंदिर गुप्तकालीन शिल्प कला जबकि जेठानी मंदिर कुषाण स्थापत्य कला का प्रतिनिधित्व करते है यह दोनों मंदिर ही 4 थीं  -5 वीं शताब्दी के मध्य बने है | देवरानी मंदिर के द्वारा पर रूद्र शिव काल पुरुष के 1500 वर्ष पुरानी अद्भुत मूर्ति है | जिसमे इसके 11 अंग विभिन्न जीव जंतुओं की मुखाकृति से निर्मित है जिनमे रौद्र भाव संचारित है |


तालागांव : देवरानी मंदिर 


तालागांव : रूद्र शिव 
मल्हार- बिलासपुर के मस्तुरी तहसील से लगभग 14 किमी दूर मल्हार पुरातात्विक महत्व का गाँव है | यहाँ खुदाई से प्राप्त अवशेषों, मूर्तियों , सिक्को आदि 2 री शताब्दी BCE से 12 शताब्दी CE तक के है | भारत के 52 शक्तिपीठों में से 51वां शक्ति पीठ मल्हार में स्थित है | यहाँ का डीडनेश्वरी मंदिर विश्वविख्यात है इसमें ऊँचे संगमरमर के आसन पर स्थापित डीडनेश्वरी देवी की प्रतिमा मूर्तिकला का सर्वोत्तम नमूना है यह मूर्ति अत्यंत कीमती शुद्ध काले ग्रेनाइट की बनी है इस मूर्ति की विशेषता यह है कि किसी कठोर वस्तु से आघात करने पर ठन –ठन की ध्वनि उत्पन्न होती है | यहाँ 200 ई.पू. की देश की प्राचीनतम चतुर्भुज विष्णु की प्रतिमा भी देखी जा सकती है | यहाँ स्थित संग्रहालय में वैष्णव, शैव व जैन संप्रदाय की प्रतिमाएं रखी हुई है | 1167 ई. में निर्मित केदारेश्वर मंदिर (पतालेश्वर) महत्वपूर्ण है | जिसका निर्माण सोमराज नामक ब्राम्हण द्वारा कराया गया था |

मल्हार :चतुर्भुज विष्णु 



मल्हार : पातालेश्वर मंदिर 

Monday, 15 September 2014

संचार क्रांति के साथ आगे बढ़ती हमारी हिंदी

वर्तमान युग नि:संदेह संचार क्रांति का है | सभी क्षेत्र की प्रगति में संचार क्रांति इस तरह मिल चुकी है की अब यह उसका अभिन्न अंग बन चुकी है चाहे वह तकनीकी क्षेत्र हो, चाहे चिकित्सा , चाहे रक्षा या व्यापार अब संचार की तकनीको का प्रयोग किये बिना इन क्षेत्रो में आगे बढ़ना असंभव ही लगता है | भाषा के विकास के  क्षेत्र में भी संचार क्रांति ने अपनी भूमिका निभाई है , संचार के आधुनिकतम साधन जैसे मोबाइल या इंटरनेट (अंतरजाल) भले ही अंग्रेजी भाषा से चालू हुए हो परन्तु समय व स्थान के अनुसार इसने बाकी भाषाओ को भी जगह दी है व उन्हें समृद्ध किया है  |
हिंदी हमारी मातृभाषा है तभी तो हमें इस भाषा से एक लगाव महसूस होता है। इस लगाव ने इंटरनेट (अंतरजाल) क्रांति के युग में भी अपनी जगह बना रखी है। कहानी हो या कविता भावप्रधान तभी लगती है जब हिंदी में लिखी और पढ़ी जाये। हिंदी से अलग होना नामुमकिन है लेकिन जब कम्प्यूटर पर काम करने का समय आया तो एक बार के लिए इस भाषा पर प्रश्न चिन्ह लग गया भारत में अब जब हर छोटी-बड़ी जगह पर काम कम्प्यूटर पर होने लगे हैं तो कम्प्यूटर बनाने वाली कम्पनियाँ भी इस बात को बखूबी जानती है कि भारत में अगर अपना वर्चस्व बढ़ाना है तो हिंदी भाषा भी ऑपरेटिंग सिस्टम में होनी चाहिये। गूगल ने हिंदी के यूनिकोड फॉन्ट उपलब्ध कराये हैं। इसके साथ ही, गूगल ने ट्रांसलिट्रेशन टूल भी लॉन्च किया जिसमें इंग्लिश में टाइप किया गया हिंदी में बदल जाता है। पहले नेट किसी हिंदी अखबार या पत्रिका को पढ़ने के लिए सही लिपि के फॉन्ट का कम्प्यूटर में डाउनलोड होना आवश्यक होता था लेकिन अब रोमन लिपि में तकनीकी विकास के कारण कभी भी, कहीं भी बिना किसी विशेष फॉन्ट डाउनलोड के हिंदी को पढ़ा जा सकता है।
मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टमों में हिन्दी का प्रवेश वर्ष 2005 के बाद शुरु हुआ। नोकिया के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम सिम्बियन के कुछ संस्करणों में आंशिक हिन्दी समर्थन आया। माइक्रोसॉफ्ट के विण्डोज़ मोबाइल के कुछ संस्करणों में आयरॉन्स हिन्दी सपोर्ट नामक थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर के जरिये हिन्दी समर्थन आया। बाद में ऍपल के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम आइओऍस, गूगल के मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम ऍण्ड्रॉइड तथा रिम के ब्लैकबेरी ओऍस में भी हिन्दी समर्थन उपलब्ध हुआ। वर्तमान में माइक्रोसॉफ्ट के विण्डोज़ फोन को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टमों में हिन्दी समर्थन है। मोबाइल में हिंदी सॉफ्टवेयर की उपलब्धता ने लोगों का काम और अधिक आसान कर दिया है।
बहरहाल इंटरनेट (अंतरजाल) पर हिंदी के शुरुआती विकास के क्षेत्र में सीएसडीएस (सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज) ने भी उल्लेखनीय काम किया है। शुरुआत में अंतरजाल पर हिंदी देखने के लिए जहां किसी भी फॉन्ट की इमेज (पीडीएफ) ही इस्तेमाल की जा सकती थी। जिस समय अंतरजाल पर हिंदी के लिए काम कर रहे सरकारी संस्थान टीआईडीएल (टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फॉर इंडियन लैंग्वेज)  और सी-डैक जैसे सरकारी विभाग तमाम अव्यावहारिक कोशिशें कर रहे थे, उस दौरान सीएसडीएस ने हिंदी के इस्तेमाल से संबंधित तमाम सॉफ्टवेयर बनाकर उनका मुफ्त वितरण शुरू कर दिया था।
वर्तमान में इंटरनेट (अंतरजाल) व मोबाइल के लगभग सभी काम हिंदी में किये जा सकते है | इससे भाषा के प्रचार प्रसार में बहुत मदद मिली है | अंतरजाल में तो हिंदी के आने से एक नई क्रांति का प्रारंभ हुआ है | वर्तमान में लगभग सभी समाचार हिंदी भाषा में अंतरजाल में उपलब्ध है जिसका उपयोग न केवल देश में रह रहे करोड़ो लोग उठा रहे है बल्कि विदेशो में बसे भारतीय भी हिंदी समाचार व साहित्य पढ़ कर आनंदित हो रहे हैं| हिंदी अन्य भारतीय भाषाओ की तुलना में अंतरजाल में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ी है इसका मुख्य कारण युवा पीढ़ी का इसे हाथो हाथ लेना है | नई पीढ़ी अंतरजाल में हिंदी के उपयोग को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है और ब्लॉग , सोशल मीडिया में इसे धडल्ले से उपयोग कर रही है | अंतरजाल में हिंदी के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए विश्व की जानी मानी माइक्रो ब्लॉगिंग साईट ट्विटर ने भी अपनी सेवा हिंदी में शुरू कर दी है यह हिंदी बोलने व पढने वालो के लिए गर्व की बात है | अंतरजाल ने हिंदी भाषा में लिखने वालो के हाथों को सशक्त किया है , सृजनशील व्यक्तियों को इंटरनेट (अंतरजाल) ने अपना मालिक खुद बना दिया है | पहले किसी लेखक को अपने विचार पाठको तक पहुचाने के लिए पुस्तक प्रकाशकों के कितने चक्कर लगाने पड़ते थे कइयो की रचनाये तो कभी पाठको के बीच पहुँच ही नहीं पाती थी परन्तु अंतरजाल ने उनके रास्ते की सभी बाधाओं को दूर कर उनकी राह आसान कर दी है | इससे अंतरजाल पर नए व युवा लेखको की बाढ़ सी आ गई है | जहाँ पहले अंतरजाल पर हिंदी के केवल इक्का दुक्का विषय ही मिलते थे पर अब उन विषयों का दायरा इतना बढ़ गया है की कोई सीमा नहीं रही |
एक हालिया सर्वेक्षण के मुताबिक हिंदी बहुत जल्द इंटरनेट (अंतरजाल) पर अंग्रेजी और चीनी भाषा के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा बन जाएगी। जबकि वर्तमान में हिंदी अंतरजाल पर उपयोग की जाने वाली शीर्ष 10 भाषाओ में भी नहीं है इसके बाद भी विशेषज्ञों का ऐसा सोचना हिंदी की क्षमता को ही दर्शाता है |
इंटरनेट (अंतरजाल) पर हिंदी की लोकप्रियता बढ़ाने में ब्लॉगिंग का अहम योगदान रहा है। ब्लॉग एक ऐसा माध्यम है जो लिखने और पढने वाले को सुकून देता है। अंतरजाल पर उपलब्ध हिंदी कंटेट(सामग्री) में सबसे बड़ा योगदान हिंदी में ब्लॉग लिखने वाले ब्लॉगरों का ही है | हिंदी का सर्वप्रथम ब्लॉग लिखने का गौरव श्री आलोक कुमार जी को जाता है जिन्होंने 21 अप्रैल 2003 को पहला ब्लॉग लिखा था, इस तरह अंतरजाल में हिंदी ब्लॉगिंग के अत्यंत सफल 10 वर्ष बीत चुके है | वर्तमान में ऐसे हिंदी ब्लागों की संख्या कई लाख तक पहुँच चुकी है | अब हिंदी भाषा के ब्लॉग मात्र अभिव्यक्ति का एक माध्यम न होकर सामाजिक मंच बन गया है  | मौजूदा दौर में हिंदी में सामुदायिक ब्लॉगों के अलावा साहित्य, संस्कृति और सिनेमा जैसे विषयों पर कई ब्लॉग सक्रिय हैं। इन ब्लॉगों पर सामाजिक मुद्दों की भी खूब धूम रहती है।  आने वाले दस वर्ष के अंदर ब्लॉग हिंदी साहित्य के विकास का प्रतीक होगा। दुनिया की अन्य भाषाएं भी इस सर्वसुलभ माध्यम का इस्तेमाल अपनी भाषा व उसके साहित्य के विकास के लिए कर रही हैं।

तो फिर हिंदी क्यों पीछे रहे?